Friday, 13 October 2017

क्रम

पुस्तक: टुकड़ा कागज़ का 
              (नवगीत-संग्रह) 
ISBN 978-81-89022-27-6
कवि: अवनीश सिंह चौहान 
प्रकाशन वर्ष: प्रथम संस्करण-2013 
पृष्ठ : 119
मूल्य: रुo 125/-
प्रकाशक: विश्व पुस्तक प्रकाशन  
304-ए,बी.जी.-7, पश्चिम विहार,
नई दिल्ली-63 
वितरक: पूर्वाभास प्रकाशन
चंदपुरा (निहाल सिंह
इटावा-206127(उ प्र) 
दूरभाष: 09456011560
ई-मेल: abnishsinghchauhan
@gmail.com  


पुस्तक: टुकड़ा कागज़ का (नवगीत-संग्रह) 
ISBN 978-93-83878-93-2
कवि: अवनीश सिंह चौहान 
प्रकाशन वर्ष: द्वितीय संस्करण -2014 (पेपरबैक)
पृष्ठ : 116
मूल्य: रुo 90/-
प्रकाशक: बोधि प्रकाशन, जयपुर
Phone: 0141-2503989, 09829018087

Book: Tukda Kagaz Ka (Hindi Lyrics)
ISBN 978-93-83878-93-2
Author: Abnish Singh Chauhan
First Edition: 2014 (Paperback)
Price: 90/-
Publisher: Bodhi rakashan, 
Jaipur, Raj, India.

 बूँद-बूँद घट
19. माँ


5 comments:

  1. पुस्तकों का हेतु रसिक व जागरुक पाठकों से आवश्यक अनुमोदन की चाहना भी होता है. अतः एक सार्थक पुस्तक को समृद्ध पाठकों तक पहुँचाया जाना साहित्यिक दायित्व भी है. इस दायित्वपूर्ति के क्रम में आप द्वारा अपने काव्य-संग्रह ’टुकड़ा काग़ज़ का’ को ई-पुस्तक का प्रारूप दिया जाना एक महत्त्वपूर्ण कदम तो है ही, लेखक-पाठक के मध्य संवाद हेतु नवीन माध्यम को अपनाया जाना भी है.
    आजके लिहाज से इस आवश्यक कदम को अपनाने के लिए हार्दिक बधाई और रचनाकर्म के लिए पुनः आत्मीय शुभकामनाएँ, भाई अवनीशजी.
    शुभ-शुभ

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  2. पुस्तक को हाथ में लेकर पढने का आनंद ई-पुस्तक में तो नहीं परन्तु, विकल्प के रूप में यह बहुत अच्छा माध्यम है जिससे ज्यादा से ज्यादा लोग पढ़ सकें. पुस्तक के लिए हार्दिक बधाई.

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  3. अवनीश भाई की किताब हाथ लेकर पढने की इच्छा जागी है....सद्लेखन....सादर

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  4. टुकडा कागज का संंग्रह के लिये बधाई

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  5. दिखने में जो शांतप्रिय, सद् विचार के कोष।
    बातचीत संवाद में, करते सच का घोष।।
    मुखमंडल जैसे अभी-, अभी खिला हो प्रात।
    कहने को अवनीश हैं, संतों-सा संतोष।।

    - वीरेंद्र आस्तिक, कानपुर

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नवगीत संग्रह ''टुकड़ा कागज का" को अभिव्यक्ति विश्वम का नवांकुर पुरस्कार 15 नवम्बर 2014 को लखनऊ, उ प्र में प्रदान किया जायेगा। यह पुरस्कार प्रतिवर्ष उस रचनाकार के पहले नवगीत-संग्रह की पांडुलिपि को दिया जा रहा है जिसने अनुभूति और नवगीत की पाठशाला से जुड़कर नवगीत के अंतरराष्ट्रीय विकास की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई हो। सुधी पाठकों/विद्वानों का हृदय से आभार।